Posted in Emotions, Feellings, Fiction, Hindi, Poetry

पनाह !!

सड़क किनारे अपने ख्यालो में खोया था |

खुद अकेले होने के जज़्बात में रोया था ||

बैठा यूँही पास खेलते बच्चों को देख रहा था |

खुद के सपनो को मन से निकाल फेंक रहा था ||

ऐसा क्या दोष था जो मुझे खुद से तोड़ दिया |

बचपन में ही मुझे अनाथालय में छोड़ दिया ||

आ कर कोई मुझे अपना बना लो ना |

कोई मुझे अपने घर में पनाह दो ना ||

 

हो मेरी भी माँ जो मेरी चिंता करें |

हो मेरे भी भाई-बहन जो मुझसे लड़े ||

हो मेरे भी पिता,जो मुझे मार्ग दिखाए |

हो मेरा भी परिवार, जो सब कुछ सिखाए ||

आ कर कोई मुझे अपना बना लो ना |

कोई मुझे अपने घर में पनाह दो ना ||

 

सुनना है मुझे भी माँ की लोरी |

खेलना है पापा के भी साथ ||

खोना है दादी की कहानियों में |

जाना है स्कूल बहनो के साथ ||

आ कर कोई मुझे अपना बना लो ना |

कोई मुझे अपने घर में पनाह दो ना ||

 

हो कोई मेरी चिंता करने वाला |

जिसे मैं अपना परिवार कह सकता ||

हो कोई मेरा भी आशियाना |

जिसे मैं अपना घर कह सकता ||

आ कर कोई मुझे अपना बना लो ना |

कोई मुझे अपने घर में पनाह दो ना ||

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

19 thoughts on “पनाह !!

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