Posted in Emotions, Hindi, Love, Poetry

हमसफर

चला था अकेले एक लंबे सफर पर

थी ख्वाहिश मन में की ये हो सुहाना

थी दुविधा की कैसे ये वक़्त कटेगा

 

जो था मेरे मन में सुना वो खुदा ने

सफर में हमे एक हमसफ़र मिल गयी

थी सोच एक जैसी, जो बातें की तो

ना जाने ये कैसी, ख़ुशी मिल गयी

 

लगा ऐसे जैसे, है रिश्ता पुराना

बिछड़ी थी जो वो फिर मिल गयी

साथ उसका और वो शानदार नज़ारा

लगा जैसे धरती यूँ फिर खिल गयी

 

उसका वो चेहरे से जुल्फें हटाना

खुद बोल कर खुद ही मुस्कुराना 

शरमा कर वो नज़रें झुकना

अनजान हो कर भी साथ निभाना

 

थम गयी जिंदगी, उसकी मासूम नज़र से

खो गया था मैं इस सुहाने सफर में 

हर बार की तरह ये वक़्त भी बीत गया

दो पल में ही लगा की मंजिल मिल गया

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

8 thoughts on “हमसफर

  1. लगा ऐसे जैसे, है रिश्ता पुराना

    बिछड़ी थी जो वो फिर मिल गयी

    साथ उसका और वो शानदार नज़ारा

    लगा जैसे धरती यूँ फिर खिल गयी
    बहुत बढ़िया !!

    Liked by 1 person

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