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रावण !!

मना कर दशहरे का त्यौहार |
सचाई की जीत दिखा रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

मार के पेट में बच्ची को,
अपना दम भी हम दिखा रहे |

छीन की उनकी खूबसूरती,
तेज़ाब से सबक सीखा रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

मांग कुछ पैसे दहेज़ के,
बेटी को भी हम सता रहे |

कर के बलात्कार लड़की का,
कपड़ो के कायदे सिखा रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

चाहत में जमीनी टुकड़ो के,
भाई का खून भी बहा रहे |

यूँ आगे बढ़ने की दौड़ में,
अपनों का दिल भी दुखा रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

आज़ादी के नाम पर,
अपनों का खून भी बहा रहे |

ले कर जान निर्दोषो की,
जन्नत जन्नत भी चिल्ला रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

देख के ऊपर से भगवान,
होंगे हँसी उड़ा रहे |

हर एक मन में रावण बैठा,
फिर भी ये रावण जला रहे ||

मना कर दशहरे का त्यौहार |
सचाई की जीत दिखा रहे ||

न रह गया कोई भी राम यहाँ |
फिर भी रावण हम जला रहे ||

Happy Dussehara to all 🙂

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

28 thoughts on “रावण !!

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