Posted in Emotions, Feellings, Hindi, Poetry

वो पल !!

ऑफिस की उलझनों की बीच आज कुछ वक़्त मिला तो Mobile में कुछ photo देखने लगा | तभी आँखों के सामने कुछ साल पुरानी photos भी आयी और मन में कुछ ख्याल, जब हम नौकरी के लिए बाहर नही बल्कि अपने घर पर रहा करते थे |

ये तो मेरा आज है,
और वो मेरा कल था |
भाग-दौड़ की जिन्दगी नही,
स्थिर एक जीवन था |
शहर के इस शोर से दूर,
अपने जीवन में मगन था |
ऑफिस के काम की चिंता नही,
शांत मेरा भी मन था |
ये भी एक पल है,
और वो भी एक पल था |

दिल भी एकदम साफ़ था,
न कोई पाप न कोई छल था |
न थी कोई भी परेशानी,
नींद ही सब का हल था |
जिम्मेदारियां कम थी क्योंकि,
साथ पिता का बल था |
सर पर किराये की छत नही,
बल्कि माँ का आँचल था |
ये भी एक पल है,
और वो भी एक पल था |

Social network का addiction नही,
समाज सच में Social था |
ये भी एक पल है,
और वो भी एक पल था |
ये तो मेरा आज है,
और वो तो मेरा कल था |

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

19 thoughts on “वो पल !!

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