Posted in Emotions, Feellings, Hindi, Personal, Poetry

साथ !!

इस घुप अन्धेरे में भी कोई दिख रहा है |
दिख रहा, वो हमेशा साथ है मेरे
दिख रहा, वो मेरी हर बात सुन रहा
दिख रहा, वो मेरे हालात समझ रहा ||

इस वीरान सन्नाटे में भी सुनाई दे रही एक आवाज है |
सुनाई दे रहा, वो भला चाहता है मेरा
सुनाई दे रहा, वो संम्भाल रहा मझे
सुनाई दे रहा, वो न बहकने देगा मझे ||

इस कठिन डगर पर एक हाथ है |
हाथ है, जो न गिरने देगा
हाथ है, जो डगमगाने पर सहारा देगा
हाथ है जो कभी न साथ छोड़ेगा ||

ऐसा ही एक साथ चाहिए था |
जो आँख बंद की तो चेहरा पहचान गया ||
जो मन शांत किया तो आवाज भी जान गया |
नाम बोलना चाहा तो अपना ही नाम लिया ||

जो संभालूं ना खुद के डगमगाते कदम,
ऐसे मेरे हाथ का क्या फायदा |
जो सुन न सकूँ खुद के रूह की बात
तो मेरे इस अलफ़ाज़ का क्या फायदा |
जो साथ न दे खुद के कठिनाई में,
ऐसे मेरी कायनात का क्या फायदा ||

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

21 thoughts on “साथ !!

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