Posted in Emotions, Hindi, Poetry

कस्तूरी !!

क्या खोजता है तू दुनिया में,
कुछ पाने की इतनी क्या मजबूरी है |
झांक कर देख खुद में एक दफा,
ख़ुशी हमारी अपनी कस्तूरी है ||

कम है पैसे तेरे पास,
या फिर किसी अपने से दूरी है |
न हो उदास, एक पल को भी,
ख़ुशी हमारी अपनी कस्तूरी है ||

ये होता तो खुश होता, ये मिलता तो खुश होता,
बिना खुद के सब खुशियाँ अधूरी है |
न है जरुरत तुझे किसी की भी दोस्त,
क्यूंकि ख़ुशी हमारी अपनी कस्तूरी है ||

Happiness lies within you 🙂 nothing/no one can make u happy except you. Keep smiling 🙂

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

35 thoughts on “कस्तूरी !!

  1. बहुत सुंदरता से वर्णन——
    न है जरुरत तुझे किसी की भी दोस्त,
    क्योंकि तेरे पास ही बैठी तेरी कस्तूरी है ||

    Liked by 1 person

  2. Nice 🍁👌👌
    खुशी ही खुद की कस्तूरी है,

    ढूंढते रहते हैं दर ब दर खुशीयाँ।
    खुद में जिंदगी को जीना जरुरी है।।

    Liked by 1 person

  3. बहुत ही अच्छा लिखा है आपने। कस्तूरी शब्द का अच्छा प्रयोग किया है। कबीर ने ठीक ही कहा कि – कस्तूरी कुंडल ब से मृग ढूंढें बन माहिर।

    Liked by 1 person

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