Posted in Emotions, Hindi, Love, Personal, Poetry

कभी-कभी ।।

यूँ तो खामोश हूँ,
पर कुछ बात उमड़ती है ।
कभी-कभी ।।

सो जाता हूँ अक्सर,
बिन सोये कुछ रात गुजरती है ।
कभी-कभी ।।

पता है तुम्हे,चमक है तुम में ।
जो मेरे आँखों में चमकती है,
कभी-कभी ।।

एक खुशबू है तुम में ।
जो मेरी रूह में महकती है,
कभी-कभी ।।

कुछ बात है तुम में ।
जो मेरी ख़यालात से मिलती है,
कभी-कभी ।।

बंजारन हो तुम ।
जो मेरे मन में भटकती है,
कभी-कभी ।।

दीपक की ज्योति हो तुम ।
जो अँधेरा भगाती है मेरा,
कभी-कभी ।।

परी हो तुम ।
जो मेरे सपनो में उड़ती हो,
कभी-कभी ।।

वैसे तो ज़ज्बात बहुत है ।
पर अब लिखता हूँ बस,
कभी-कभी ।।

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Author:

Not organized, But you will not find it messy. Not punctual, But will be there at right Time. Not supportive, But will be there, when needed. Not a writer, But you will find this interesting.

25 thoughts on “कभी-कभी ।।

  1. बेहद खूबसूरत।क्या मेरा दिल भी पढ़ लिया कभी कभी।कुछ अपनेपन का अहसास जगाती तुम्हारी बात कभी कभी।beautifully writren,dear!!🌹🌹🌹🌹🌹🌹

    Liked by 1 person

  2. बहुत ही बेहतरीन कविता। कभी कभी शब्द ने कमाल कर दिया।सच बहुत कुछ दिल में है कहना चाहता हूँ,मगर लिखता हूँ कभी कभी।👌👌👌

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