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अनकहे अल्फ़ाज़ !!!

मन में कोई हिचक नहीं,
जाओ दिल की बात कह दो |
घुमा-फिरा के चंद शब्द नहीं,
इत्मीनान से पूरी किताब कह दो ||
डर डर के कुछ झूठ नहीं,
सच्चे दिल के अल्फ़ाज़ कह दो |
रूठने, छूटने का गम नहीं,
खुद में छुपी हर बात कह दो ||

छोड़ के अपने अहम् को,
जाओ दिल के जज़्बात कह दो |
तोड़ के वक़्त की पाबन्दी,
हर दिन,हर पहर, हर रात कह दो ||
दूर जाने के पहले किसी के,
अपने मन के हर एक एहसास कह दो |
घुट-घुट के क्यों जीना है,
खुद के विचारो को आज़ाद कह दो ||

छोड़ 4 लोगो की चिंता को,
जाओ, दिल की बात कह दो |
होठ की सारी मुस्कुराहट और,
आँखों की सारी बरसात कह दो ||
जाओ,उठो, आज और अभी
प्यार माफ़ी या कोई ग़लतफ़हमी |
छोड़ डर, खौफ और घबराहट को
मुस्कुराओ, और दिल की बात कह दो ||

निकाल के सारे जज़्बात को,
रिश्ते, मन सब साफ़ कर दो |
जाओ, सब कुछ माफ़ कर दो,
आज, कल और परसो नहीं
अभी , इसी वक़्त और
एक साथ कह दो ||
मन में और कोई हिचक नहीं ,
जाओ सब कुछ साफ़ कह दो |
दिल क ज़ज़्बात और
मन के सारे अल्फ़ाज़ कह दो ||

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मैं कवि हूँ !!!

ख़ुशी, दुःख, हँसी और आंसू
सबकुछ एक साथ लिखता हूँ
मुस्कान की चमक को दिन
जुल्फ के अंधेरो को रात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
लोगो के जज़्बात लिखता हूँ

शर्म से आँख झुकाना हो
कुछ कहने से घबराना हो
पहली नज़र, पहली मुस्कान से लेकर
हर एक मुलाकात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
मन की बात लिखता हूँ

मिलन का प्रेम हो
या विरह की पीड़ा
दिल धड़कना, घबराना
सब एक साथ लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
इश्क़ के अल्फ़ाज़ लिखता हूँ

धर्म, समाज या राजनीति हो
तेज़ाब, दुष्कर्म, दहेज़ से
बेबस हमारे देश की बेटी हो
सब पर अपने ख्यालात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
कमज़ोर, बेबस की आवाज़ लिखता हूँ

लोगो की बेड़ियाँ तोड़ कर
विचार अपने आज़ाद लिखता हूँ
कल क्या हुआ, ना पता
क्या क्या होगा, क्या पता
मैं कवि हूँ
मैं बस और बस आज लिखता हूँ

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क़शमक़श !!

भर आती है आँखें, घर की याद में |
आंसू बहा दिया जाये, या पी लिया जाये ||

अजीब क़शमक़श है जिंदगी |
कमाया जाये, या जी लिया जाये ||

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मयखाना !!

जो होना था वो हो गया,
क्या फायदा अब पछताने का |
मनाता रहा खुद को मैं,
न कोई असर था समझाने का ||

एक ख़लिश थी जिंदगी में,
क्या दोष था इस ज़माने का |
ख़ुशी खोजता रहा दर-ब-दर,
पता था उसका, शहर के मयखाने का ||

न तुम थी, न तुम्हारी चूड़ियाँ,
वो खनक थी, जाम टकराने का |
भूलता था सब, तेरी आँखें देख कर,
ये रास्ता था, उन आँखों को भुलाने का ||

जो तड़प थी, एक झलक की,
ये जरिया था उसे बुझाने का |
बची थी अस्थियाँ, जो रिश्तो की चिता पर,
इंतज़ाम था मयखाने में, उसे भी बहाने का ||

Cheers to all readers 😉

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पन्ने…जिंदगी के !!

लिखता हूँ मैं जिंदगी को पन्नो पर,
वो जिंदगी जो हमे हँसाती है,
वो जिंदगी जो हमे सीखती है,
वो जिंदगी जिससे आप सब है |

भरता था पन्ने, दिनब-दिन,
कैद करता था, कुछ यादों को,
कुछ अच्छी यादें, कुछ प्यारे लोग,
भरता था पन्ने, हर एक बात से,
भूलना चाहता था, कुछ एक हालात को,
हालात जो साथ थे, जो सबक थे |

बैठा खाली उन पन्नो को पलट रहा था,
पिछले साल का हालात समझ रहा था,
चेहरे पर मेरे कभी मुस्कान रही थी,
तो कभी आँखों में नमी छा रही थी,
मन मेरा कभी गाने गा रहा था,
तो दिल में भी कभी भारीपन रहा था |

फिर दिमाग ने दिल से बगावत कर दी,
दिमाग के तर्क सुन कर दिल ने भी हा कर दी,
दोनों आज़ाद करना चाहते थे उन पलों को,
जिन्हें लिख लिख कर मैंने Diary भर दी,
फिर क्या था उन पन्नो को मैंने बर्बाद कर दिया,
वो पल, वो लोग और वो हालात को आज़ाद कर दिया |

वो कागज, खतरनाक हो रहे थे,
दिन रात अलमारी में रो रहे थे ,
आखरी बार उनमे कुछ, अल्फ़ाज़ कह दिया
सीने से लगा कर फिर, उन्हें मुखाग्नि दे दिया

बंद हो गया उन पन्नो का चीखना
खुल गए वो समेटे पल
चारो तरह एक अजीब सा सन्नाटा छा गया
शायद अलमारी से रही सिसकिया रही
ठंडी हवा के झोंको सा एहसास हुआ
शायद उन पलो ने भी धन्यवाद कह दिया

Very few people (i guess no one) know that i was writing diary on regular basis, and as i don’t have those “secret diary” anymore with me so i thought to write something on same. To thanks for always being with me in my good or very good (positive attitude ;)) phase.