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मेरे अल्फ़ाज़ !!!

शांत था मैं झील सा,
ख्वाब टूटते गए
उफान बढ़ता गया ।
पहाड़ था कठनाइयों का,
लोग हँसते गए,
मैं चढ़ता गया ।।

बांध था सब्र का मुझमे,
लोग आज़माते गए,
मैं टूटता गया ।
हुजूम था लोगो का इर्द-गिर्द,
जरुरत पड़ती गयी,
लोग मुकरते गए ।।

उफान था दर्द का अंदर,
मैं लिखता गया,
अल्फ़ाज़ मिलते गए ।
कुछ पूरे, तो कुछ अधूरे रहे,
मैं कहता गया,
कविता बनती गयी ।।

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सैलाब…मन का

रूह के अपने इल्ज़ामो का,
आज मन में हिसाब चल रहा |
घनघोर सन्नाटो में भी,
मन में सैलाब चल रहा ||

बस सवाल उठ रहे,
ना कोई जवाब चल रहा |
हकीकत चल रही,
ना कोई ख्वाब चल रहा ||

पूछताछ चल रही खुद से,
ना तमाशा, ना कुछ बर्बाद चल रहा |
कुछ विन्नते, कुछ मुखबिरी,
तो कुछ फरियाद चल रहा ||

ना कुछ अच्छा,
ना कुछ खराब चल रहा |
कुछ भी तो नहीं ये,
खुद से खुद का हिसाब चल रहा ||

अपनी जिम्मेदारी, सपने और ख़ुशी,
सबपर सवाल जवाब चल रहा |
घनघोर सन्नाटो में भी,
मन में सैलाब चल रहा ||

Image : Google

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लुक्का-छिप्पी !!

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

कई दर्द छिपे है,
मुस्कान के पीछे ।
किस्से छिपे है,
हर एक नाम के पीछे ।।

ख्वाहिशें छिपी है,
ईनाम के पीछे ।
जज्बात छिपे है,
हर जाम के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
आँख मिचोली का ।।

मजबूरियाँ छिपी है,
हर काम के पीछे ।
स्वार्थ छिपा है,
हर सलाम के पीछे ।।

लालच छिपा है,
ईमान के पीछे ।
कई चेहरे छिपे है,
हर इंसान के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

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आंसू हूँ मैं !

आंसू हूँ मैं,
आँखों का पानी नहीं हूँ !

ज़ज़्बात हूँ रूह की,
कोई दुखभरी कहानी नहीं हूँ ।
सुकून हूँ दर्द में,
कमज़ोरी की निशानी नहीं हूँ ।।

भावुकता हूँ दिल की,
भूचाल या सुनामी नहीं हूँ ।
ख़ुशी में भी शामिल हूँ,
बस दुःख की दीवानी नहीं हूँ ।।

आंसू हूँ मैं,
बस आँखों का पानी नहीं हूँ !

Image Credit – Google

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किरदार !!

इस रंग बदलती दुनिया में,
बेमतलब का प्यार खोज रहा हू ।
प्यार, मोहब्बत या इश्क़ नहीं,
साथ निभाने वाला यार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

छोड़ चुके रंगमंच जो,
उन्हें भी बार बार खोज रहा हू ।
जो थे न कभी अपने,
उन्हें तो बेकार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

इस ज्ञान भरी दुनिया में,
कुछ अपने विचार खोज रहा हू ।
इस चकाचौंध सी दुनिया में,
थोड़ा सा सुनसान खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

बीत रही तारीख-ए-जिंदगी,
जिन्दा होने का सार खोज रहा हू ।
खुद को जो न पहचान सका तो,
किसी और को तो बेकार ही खोज रहा हू ।।
खुद की सोच, खुद की रूह,
और खुद के संस्कार खोज रहा हू ।
हर पल बदलती कहानी में,
अपना असल किरदार खोज रहा हू ।।