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लुक्का-छिप्पी !!

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

कई दर्द छिपे है,
मुस्कान के पीछे ।
किस्से छिपे है,
हर एक नाम के पीछे ।।

ख्वाहिशें छिपी है,
ईनाम के पीछे ।
जज्बात छिपे है,
हर जाम के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
आँख मिचोली का ।।

मजबूरियाँ छिपी है,
हर काम के पीछे ।
स्वार्थ छिपा है,
हर सलाम के पीछे ।।

लालच छिपा है,
ईमान के पीछे ।
कई चेहरे छिपे है,
हर इंसान के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

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आंसू हूँ मैं !

आंसू हूँ मैं,
आँखों का पानी नहीं हूँ !

ज़ज़्बात हूँ रूह की,
कोई दुखभरी कहानी नहीं हूँ ।
सुकून हूँ दर्द में,
कमज़ोरी की निशानी नहीं हूँ ।।

भावुकता हूँ दिल की,
भूचाल या सुनामी नहीं हूँ ।
ख़ुशी में भी शामिल हूँ,
बस दुःख की दीवानी नहीं हूँ ।।

आंसू हूँ मैं,
बस आँखों का पानी नहीं हूँ !

Image Credit – Google

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किरदार !!

इस रंग बदलती दुनिया में,
बेमतलब का प्यार खोज रहा हू ।
प्यार, मोहब्बत या इश्क़ नहीं,
साथ निभाने वाला यार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

छोड़ चुके रंगमंच जो,
उन्हें भी बार बार खोज रहा हू ।
जो थे न कभी अपने,
उन्हें तो बेकार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

इस ज्ञान भरी दुनिया में,
कुछ अपने विचार खोज रहा हू ।
इस चकाचौंध सी दुनिया में,
थोड़ा सा सुनसान खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

बीत रही तारीख-ए-जिंदगी,
जिन्दा होने का सार खोज रहा हू ।
खुद को जो न पहचान सका तो,
किसी और को तो बेकार ही खोज रहा हू ।।
खुद की सोच, खुद की रूह,
और खुद के संस्कार खोज रहा हू ।
हर पल बदलती कहानी में,
अपना असल किरदार खोज रहा हू ।।

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हालात !

थोड़ी हवा चलती, कुछ यादो के पन्ने पलटते ।
थाम के हाथ मेरा, थोड़ा दूर और साथ चलते ।।
मेरे हालात का वास्ता देकर, छोड़ जाने वाले लोग ।
कुछ देर और रुकते, मेरे भी हालात बदलते ।।

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गुनाह !!!

हाँ, मैंने चोरी की !!!
पर खुद क लिए नहीं,
उसके लिए की |
जो अपना सबकुछ,
हँस के दुसरो को दे देती है ||
जो सबके हर तकलीफ,
हँस के सुन लेती है |
जो अपने सारे गम,
चुपचाप सह लेती है ||

हाँ, मैंने चोरी की !!!
चुराया मैंने,
अपने जिंदगी से
कुछ लम्हे |
बस उसके लिए ||
उन लम्हो में ,
मैं उसे हँसाऊँगा |
उसे उसकेहोने का,
एहसास दिलायूँगा ||

हाँ, मैंने चोरी की !!!
बस और बस उसके लिए,
और अगर इस गुनाह
की सजा मौत है |
तो जनाब !!!
नहीं डरता मैं मौत से ||

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ख़ामोशी…एक चीख

एक अर्सा बीत गया था,
एक-दूसरे को कुछ बताये हुए |
बेख़ौफ़ नज़रे मिलाये हुए,
एक साथ मुस्कुराये हुए ||
कुछ गांठे पड़ गयी थी,
मन में बातें छुपाये हुए |
ग़लतफ़हमी बिन सुलझाए हुए,
हालत को दोषी बनाये हुए ||

फिर वो दोनों साथ बैठे है,
खुद को खुश दिखाए हुए  |
कुछ न हुआ ये जताये हुए,
अंदर के तूफान को छुपाये हुए ||
रूह के सवालो को दबाये हुए,
मन के शोर को खामोश कराये हुए |
सब कुछ अच्छा बताये हुए,
चेहरे पे मुस्कान चिपकाये हुए ||

फिर वो दोनों साथ बैठे है,
खुद को खुश दिखाए हुए |
सब कुछ अच्छा बताये हुए,
चेहरे पे मुस्कान चिपकाये हुए ||