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अलग हूँ थोड़ा !!

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
झूठ नहीं बोलता,
बस कुछ बातें छुपाता हूँ ।।

मजबूत हूँ वैसे,
कभी कभी कमजोर पड़ जाता हूँ ।
रोता नहीं हूँ,
खामोश हो जाता हूँ ।।

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
रोशन करने को सारा जहां,
खुद के अरमान जलाता हूँ ।।

निडर हूँ मैं,
कभी कभी सिहर जाता हूँ।
टूटता नहीं कभी,
बस थोड़ा सा बिखर जाता हूँ ।।

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
झूठ नहीं बोलता,
बस कुछ बातें छुपाता हूँ ।।

Image Credit – Google

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मैं जागता रहा..!!!

खामियाज़ा सपनो का,
कुछ यूँ भुगतता रहा |
रात ढलती रही,
और मैं जागता रहा ||

ख्वाहिशो के पीछे,
इस कदर लगता रहा |
वक़्त गुजरता रहा और मैं,
मौत की तरफ भागता रहा ||

जिंदगी की दौड़ में,
हर रोज़ फंसता रहा |
देख दुनिया को मैं,
खुद पर ही हँसता रहा ||

साख बनाने को समाज में,
खुद का अरमान घुटता रहा |
सांस लेता रहा पर,
जिंदगी जीना छूटता रहा ||

सब “ठीक है” कह कर,
खुद को ही ठगता रहा !
रात ढलती रही,
और मैं जागता रहा…………..||

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अनकहे अल्फ़ाज़ !!!

मन में कोई हिचक नहीं,
जाओ दिल की बात कह दो |
घुमा-फिरा के चंद शब्द नहीं,
इत्मीनान से पूरी किताब कह दो ||
डर डर के कुछ झूठ नहीं,
सच्चे दिल के अल्फ़ाज़ कह दो |
रूठने, छूटने का गम नहीं,
खुद में छुपी हर बात कह दो ||

छोड़ के अपने अहम् को,
जाओ दिल के जज़्बात कह दो |
तोड़ के वक़्त की पाबन्दी,
हर दिन,हर पहर, हर रात कह दो ||
दूर जाने के पहले किसी के,
अपने मन के हर एक एहसास कह दो |
घुट-घुट के क्यों जीना है,
खुद के विचारो को आज़ाद कह दो ||

छोड़ 4 लोगो की चिंता को,
जाओ, दिल की बात कह दो |
होठ की सारी मुस्कुराहट और,
आँखों की सारी बरसात कह दो ||
जाओ,उठो, आज और अभी
प्यार माफ़ी या कोई ग़लतफ़हमी |
छोड़ डर, खौफ और घबराहट को
मुस्कुराओ, और दिल की बात कह दो ||

निकाल के सारे जज़्बात को,
रिश्ते, मन सब साफ़ कर दो |
जाओ, सब कुछ माफ़ कर दो,
आज, कल और परसो नहीं
अभी , इसी वक़्त और
एक साथ कह दो ||
मन में और कोई हिचक नहीं ,
जाओ सब कुछ साफ़ कह दो |
दिल क ज़ज़्बात और
मन के सारे अल्फ़ाज़ कह दो ||

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मैं कवि हूँ !!!

ख़ुशी, दुःख, हँसी और आंसू
सबकुछ एक साथ लिखता हूँ
मुस्कान की चमक को दिन
जुल्फ के अंधेरो को रात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
लोगो के जज़्बात लिखता हूँ

शर्म से आँख झुकाना हो
कुछ कहने से घबराना हो
पहली नज़र, पहली मुस्कान से लेकर
हर एक मुलाकात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
मन की बात लिखता हूँ

मिलन का प्रेम हो
या विरह की पीड़ा
दिल धड़कना, घबराना
सब एक साथ लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
इश्क़ के अल्फ़ाज़ लिखता हूँ

धर्म, समाज या राजनीति हो
तेज़ाब, दुष्कर्म, दहेज़ से
बेबस हमारे देश की बेटी हो
सब पर अपने ख्यालात लिखता हूँ
मैं कवि हूँ
कमज़ोर, बेबस की आवाज़ लिखता हूँ

लोगो की बेड़ियाँ तोड़ कर
विचार अपने आज़ाद लिखता हूँ
कल क्या हुआ, ना पता
क्या क्या होगा, क्या पता
मैं कवि हूँ
मैं बस और बस आज लिखता हूँ