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दूर तक जाना है !!

कुछ पाया है, कुछ अभी पाना है,
आँखों में ख्वाब है, ख्वाहिशो का ठिकाना है ।
लड़खड़ा जाये कदम तो, डरना नहीं ,
एक सफर है ये, बहुत दूर तक जाना है ।।

हौसलों का साधन है, अरमानो का आशियाना है,
कुछ सीख है, कुछ जिंदगी का अफसाना है ।
रुका हूँ कुछ पल, जिंदगी का लुत्फ़ उठाने को,
थका नहीं हूँ, अभी तो जीतने को जमाना है । ।

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अब मैं…..!!!

डगमगा रहे है कदम,
पर लड़खड़ाता नहीं हूँ ।
टूटता हूँ मैं रोज़,
पर चिल्लाता नहीं हूँ ।।

बहुत कश्मकश है रूह की,
चुप हो जाता हूँ, बताता नहीं हूँ ।
ऐसा होता, वैसा होता सब सोचता हूँ,
अपने फैसलों पर पछताता नहीं हूँ ।।

डर तो आज भी बहुत लगता है,
पर अब मैं घबराता नहीं हूँ ।
शिकायतें तो मुझे भी बहुत है ,
मगर हर बात मैं जताता नहीं हूँ ।।

माफ़ कर देता हूँ हर शख्श को पर,
बुरा क्या लगा, ये भुलाता नहीं हूँ ।
थक गयी है आँखें, सारे फरेब देख कर,
बस बंद करता हूँ,कभी आँखों को सुलाता नहीं हूँ ।।

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जिंदगी……एक सच !!!

उम्र क पड़ाव पर,
इस कदर चलते गए ।
कदमो में ज़ख्म थे,
पर आगे बढ़ते गए ।।

‘हम’ और ‘समाज’ ,
इस कदर लड़ते गए ।
समाज दोष देता रहा,
‘हम’ बदलते गए ।।

नाकामयाबियों की कसक,
इस कदर पलती गयी ।
स्वाभिमान की आग थी,
और रूह जलती गयी ।।

हर शाम जिंदगी के पन्ने,
इस कदर लिखते गए ।
जरुरत जीतती रही और,
शौक बिकते गए ।।

जीने की कोशिश ।
इस कदर करते गए ।
जिन्दा, तो क्या पता,
हर रोज़, कई दफा मरते गए ।।

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अलग हूँ थोड़ा !!

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
झूठ नहीं बोलता,
बस कुछ बातें छुपाता हूँ ।।

मजबूत हूँ वैसे,
कभी कभी कमजोर पड़ जाता हूँ ।
रोता नहीं हूँ,
खामोश हो जाता हूँ ।।

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
रोशन करने को सारा जहां,
खुद के अरमान जलाता हूँ ।।

निडर हूँ मैं,
कभी कभी सिहर जाता हूँ।
टूटता नहीं कभी,
बस थोड़ा सा बिखर जाता हूँ ।।

अलग हूँ थोड़ा,
हँसता हूँ, मुस्कुराता हूँ ।
झूठ नहीं बोलता,
बस कुछ बातें छुपाता हूँ ।।

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मैं जागता रहा..!!!

खामियाज़ा सपनो का,
कुछ यूँ भुगतता रहा |
रात ढलती रही,
और मैं जागता रहा ||

ख्वाहिशो के पीछे,
इस कदर लगता रहा |
वक़्त गुजरता रहा और मैं,
मौत की तरफ भागता रहा ||

जिंदगी की दौड़ में,
हर रोज़ फंसता रहा |
देख दुनिया को मैं,
खुद पर ही हँसता रहा ||

साख बनाने को समाज में,
खुद का अरमान घुटता रहा |
सांस लेता रहा पर,
जिंदगी जीना छूटता रहा ||

सब “ठीक है” कह कर,
खुद को ही ठगता रहा !
रात ढलती रही,
और मैं जागता रहा…………..||

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सैलाब…मन का

रूह के अपने इल्ज़ामो का,
आज मन में हिसाब चल रहा |
घनघोर सन्नाटो में भी,
मन में सैलाब चल रहा ||

बस सवाल उठ रहे,
ना कोई जवाब चल रहा |
हकीकत चल रही,
ना कोई ख्वाब चल रहा ||

पूछताछ चल रही खुद से,
ना तमाशा, ना कुछ बर्बाद चल रहा |
कुछ विन्नते, कुछ मुखबिरी,
तो कुछ फरियाद चल रहा ||

ना कुछ अच्छा,
ना कुछ खराब चल रहा |
कुछ भी तो नहीं ये,
खुद से खुद का हिसाब चल रहा ||

अपनी जिम्मेदारी, सपने और ख़ुशी,
सबपर सवाल जवाब चल रहा |
घनघोर सन्नाटो में भी,
मन में सैलाब चल रहा ||

Image : Google

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लुक्का-छिप्पी !!

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

कई दर्द छिपे है,
मुस्कान के पीछे ।
किस्से छिपे है,
हर एक नाम के पीछे ।।

ख्वाहिशें छिपी है,
ईनाम के पीछे ।
जज्बात छिपे है,
हर जाम के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
आँख मिचोली का ।।

मजबूरियाँ छिपी है,
हर काम के पीछे ।
स्वार्थ छिपा है,
हर सलाम के पीछे ।।

लालच छिपा है,
ईमान के पीछे ।
कई चेहरे छिपे है,
हर इंसान के पीछे ।।

खेल है जिंदगी ।
लुक्का छिप्पी का ।।

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किरदार !!

इस रंग बदलती दुनिया में,
बेमतलब का प्यार खोज रहा हू ।
प्यार, मोहब्बत या इश्क़ नहीं,
साथ निभाने वाला यार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

छोड़ चुके रंगमंच जो,
उन्हें भी बार बार खोज रहा हू ।
जो थे न कभी अपने,
उन्हें तो बेकार खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

इस ज्ञान भरी दुनिया में,
कुछ अपने विचार खोज रहा हू ।
इस चकाचौंध सी दुनिया में,
थोड़ा सा सुनसान खोज रहा हू ।।
जिंदगी एक कहानी है ।
कहानी का एक किरदार खोज रहा हू ।।

बीत रही तारीख-ए-जिंदगी,
जिन्दा होने का सार खोज रहा हू ।
खुद को जो न पहचान सका तो,
किसी और को तो बेकार ही खोज रहा हू ।।
खुद की सोच, खुद की रूह,
और खुद के संस्कार खोज रहा हू ।
हर पल बदलती कहानी में,
अपना असल किरदार खोज रहा हू ।।

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अनकहे अल्फ़ाज़ !!!

मन में कोई हिचक नहीं,
जाओ दिल की बात कह दो |
घुमा-फिरा के चंद शब्द नहीं,
इत्मीनान से पूरी किताब कह दो ||
डर डर के कुछ झूठ नहीं,
सच्चे दिल के अल्फ़ाज़ कह दो |
रूठने, छूटने का गम नहीं,
खुद में छुपी हर बात कह दो ||

छोड़ के अपने अहम् को,
जाओ दिल के जज़्बात कह दो |
तोड़ के वक़्त की पाबन्दी,
हर दिन,हर पहर, हर रात कह दो ||
दूर जाने के पहले किसी के,
अपने मन के हर एक एहसास कह दो |
घुट-घुट के क्यों जीना है,
खुद के विचारो को आज़ाद कह दो ||

छोड़ 4 लोगो की चिंता को,
जाओ, दिल की बात कह दो |
होठ की सारी मुस्कुराहट और,
आँखों की सारी बरसात कह दो ||
जाओ,उठो, आज और अभी
प्यार माफ़ी या कोई ग़लतफ़हमी |
छोड़ डर, खौफ और घबराहट को
मुस्कुराओ, और दिल की बात कह दो ||

निकाल के सारे जज़्बात को,
रिश्ते, मन सब साफ़ कर दो |
जाओ, सब कुछ माफ़ कर दो,
आज, कल और परसो नहीं
अभी , इसी वक़्त और
एक साथ कह दो ||
मन में और कोई हिचक नहीं ,
जाओ सब कुछ साफ़ कह दो |
दिल क ज़ज़्बात और
मन के सारे अल्फ़ाज़ कह दो ||