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अजीब दास्ताँ !!

अजीब दास्ताँ है,
पुरानी तश्वीरो की |
इनको देख भी नहीं सकता,
इनको फेंक भी नहीं सकता ||

अजीब किस्से है,
पुरानी यादो के |
जिन्हे सहेज भी नहीं सकता,
और परहेज़ भी नहीं कर सकता ||

अजीब सुरूर है,
पुराने सपनो का |
उनमे रह भी नहीं सकता,
किसी से कह भी नहीं सकता ||