Posted in Emotions, Hindi, Love, Poetry, Sad

तड़प !!

तरस गयी हूँ, घूमने के लिए,
बारिश में भीगने के लिए |

एक चाय का प्याला पीने के लिए,
कुछ पल उनके साथ जीने के लिए ||

उनकी आँखो में खोने के लिए,
कंधे पर सिर रख रोने के लिए |

तरस गए हम वक़्त पाने के लिए,
उनके मन के ज़ज्बात जानने के लिए ||

तरस गए है, उनसे प्यार जताने के लिए,
वो मेरे है, इस ख़ुशी पर इतराने के लिए |

प्यार के एहसास महसूस करने के लिए,
छोटी-छोटी बातों पर मोहब्बत से लड़ने के लिए ||

प्यार से उनको कुछ खत लिखने के लिए,
खत पढ़ कर,उनके अल्फ़ाज़ सुनाने के लिए |

पर उनके पास मेरे लिए वक़्त कहाँ है,
खुश है वहीं, वो अब जहाँ है ||

उसके लिए भी तो बादल बरसता होगा,
भीगने के लिए वो भी तरसता होगा ||

उसे भी तो कुछ बताना होगा ना,
शायद मुझसे प्यार जाताना होगा ना |

हकीकत ना सही ये सब,
सपने पुरे ख्वाब में करेंगे|
मिलने दो कभी,
हर एक तड़प हिसाब में करेंगे ||

Idea Credit & Original poem – “RITIKA”.  Modified by – “ROHIT”

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अंतहीन !!

आकाश सी है दो चीज़े,
न जाने अंत है इनका कहाँ |
पहली तो मेरी “मोहब्बत”
और दूसरी तेरी “न” ||

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Love & Pen…

जब तक मृग जैसे नैन तेरे,
और गर्दन तेरी सुराही है |
तब तक हम लिखेंगे ||

जब तक मैं हूँ साथ तेरे,
और तू मेरी हमराही है |
तब तक हम लिखेंगे ||

जब तक तू है किताब मेरी,
और तेरी आँखें मेरी पढाई है |
तब तक हम लिखेंगे ||

जब तक दिल में है प्यार मेरे,
और कलम में स्याही है |
तब तक हम लिखेंगे ||

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वो …

वो टूट रही थी,
मैं बचा नहीं पाता,
पर संभाल जरूर लेता |

वो परेशान थी,
मैं कुछ बदल नहीं पाता,
पर हँसा जरूर देता ||

वो थी क़शमक़श में,
मैं ख़त्म नहीं करता,
पर राय जरूर देता |

वो दूर जा रही थी खुद से,
मैं पास नहीं होता,
पर रोक जरूर लेता ||

वो रो रही थी मन में,
मैं सुन नहीं पाता,
पर समझ जरूर लेता |

गिर रही थी जिंदगी में,
मैं संभाल नहीं पाता,
पर हाथ जरूर देता ||

अकेले हो गयी थी वो,
मैं रोक नहीं पाता,
पर साथ जरूर देता |

कसम दे गयी दूर जाने की वरना,
मैं उसका हो नहीं पाता
पर उसे खो भी नहीं देता ||