Posted in Fiction, Hindi, Poetry, Sad

वक़्त !!

उन्हें जरुरत थी हमारी तो,
खुद को मेरा हमदर्द दिखा रहे थे |

कोई न था साथ देने को उनका,
तो सपने हमे हर पल दिखा रहे थे ||

वक़्त आया सपनो के जीने का,
वो हर रोज़, हमे कल दिखा रहे थे |

हम नासमझ सच मान बैठे और,
वक़्त बदलते ही वो अपना रंग दिखा रहे थे ||

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जिंदगी !!

क्यों है परेशान,
क्यों सोचता है बेगाने का |
जख्म दे कर हँसना,
ये काम है ज़माने का ||

वो बात किसी और में नही,
जो बात तेरे सख्श में है ||
ये इल्म है, तू मान ले,
हँस कर जिंदगी बिताने का ||

तू वो नही, तू है अलग,
वक़्त है ये दिखाने का |
रब ने बख्शा है हुनर,
तुझे हर पल मुस्कुराने का ||

Posted in Hindi, Love, Poetry

इंतज़ार

न बदला कुछ भी यहाँ |
पर मौसम कुछ बेकरार सा है ||

तेरे चेहरे की चमक न रही अब यहाँ |
और मेरा सुकून भी कहीं फरार सा है ||

बदल दिया तूने घर का पता |
पर तेरी गलियों से आज भी प्यार सा है ||

पता है तू न लौटेगी कभी |
पर आँखों को तेरा इंतज़ार सा है ||

यूँ तो मिलता हूँ सबसे मुस्कुरा कर |
पर ये कमबख़्त दिल अब बीमार सा है ||

Posted in Hindi, Love, Poetry

बे-नाम

यूँही फिर खुद को परेशान कर लिया |
तेरे ख्यालो में सुबह से शाम कर लिया ||

न जाने क्यों चाहने लगा था तुझे इतना |
की खुद को ही मैंने बे-नाम कर लिया ||

थक गया था तुझे बुला बुला कर |
बुलाना छोड़ कर थोड़ा आराम कर लिया ||

उठाएगा न कोई भी ऊँगली अब तुझ पर |
सारी बेवफाई जो मैंने अपने नाम कर लिया ||

Posted in Emotions, Hindi, Personal, Poetry

आज !!

लोग पूछे न कुछ इसलिए |
मुस्कुराना अपना अंदाज़ बना लिया ||

हमदर्द भी अपना, बस काज़ बना लिया |
चीखो को काज़ पर अलफ़ाज़ बना लिया ||

खत्म होने को तो होते रहे किस्से |
सबको एक सुन्दर आगाज़ बना लिया ||

कल जो हुआ,जो होगा अपने हाथ में नही |
तो जीने के लिए, बस और बस आज बना लिया ||

Posted in Hindi, Love, Poetry, Sad

मर्ज़ !!

गवाह थी जो कुछ हसीन पलो की |
तो कुछ पल ये मेरा हमदर्द था ||

गरमाहट थी फिज़ाओ में, तेरी यादों से |
तो टूटे सपने से मौसम थोड़ा सर्द था ||

ख़ूबसूरती समेटे था जो कल तक मोहब्बत की |
वही जमाना आज कितना बेदर्द था ||

आगे बढ़ गयी तू समझदार बन कर |
हमें नही, सिर्फ मुझे ही मोहब्बत का मर्ज़ था ||

खाते रहे दोनों कई कसमे साथ में |
क्या उन्हें निभाना केवल मेरा ही फ़र्ज़ था ?

Posted in Hindi, Poetry, Sad

चेहरा !!

बीच मंझधार में थी कश्ती,

पास मेरे कोई किनारा न था |

घिरा था कहीं तूफानों में,

पर साथ कोई सहारा न था ||

उम्मीद थी जिससे हौसले की,

वो सख्शियत इतना बेगाना न था |

चेहरा तो आज भी वही था,

पर अब वो सख्श हमारा न था ||